भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI) को हमारे देश की न्यायपालिका का ‘मुखिया’ कहा जाता है। देश में जब भी कोई बड़ा कानूनी विवाद या संवैधानिक संकट आता है, तो पूरे देश की नज़रें सीधे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर टिक जाती हैं।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी वाले पद पर नियुक्ति कैसे होती है? भारत के मुख्य न्यायाधीश का चयन कैसे किया जाता है? और उनके पास असल में कितनी शक्तियां होती हैं?
Goal Naukri के इस लेख में हम CJI की नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया, संविधान के नियमों और उनकी उन असीमित शक्तियों के बारे में विस्तार से जानेंगे, जिनसे आम नागरिक अक्सर अनजान होते हैं।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) कौन होता है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत देश में एक सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना का प्रावधान है, जिसके शीर्ष पर भारत के मुख्य न्यायाधीश होते हैं। CJI को भारतीय न्यायपालिका में “फर्स्ट अमंग इक्वल्स” (First among equals) यानी ‘समानों में प्रथम’ माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों में उनका पद सबसे ऊंचा होता है और न्यायपालिका का पूरा प्रशासन उन्हीं की देखरेख में चलता है।
एक जज के रूप में सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने के लिए किसी व्यक्ति का भारत का नागरिक होना ज़रूरी है। साथ ही, उसे कम से कम 5 साल तक किसी हाई कोर्ट का जज, या 10 साल तक हाई कोर्ट का वकील होना चाहिए, या फिर राष्ट्रपति की नज़र में एक सम्मानित न्यायविद (Jurist) होना चाहिए।
भारत के मुख्य न्यायाधीश का चयन कैसे किया जाता है?
भारत में मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया काफी दिलचस्प और पारदर्शी है। यह नियुक्ति मुख्य रूप से वरिष्ठता के नियम (Convention of Seniority) पर आधारित होती है। 1993 के ‘सेकंड जजेस केस’ (Second Judges Case) के बाद से यह लगभग तय है कि सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज को ही अगला CJI बनाया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (Memorandum of Procedure – MoP) के तहत निम्नलिखित चरणों में होती है:
- सिफारिश: जब वर्तमान CJI के रिटायरमेंट का समय नज़दीक आता है, तो वे अपने उत्तराधिकारी (सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज) के नाम की सिफारिश करते हैं।
- कानून मंत्री की भूमिका: वर्तमान CJI यह सिफारिश भारत के केंद्रीय कानून मंत्री (Law Minister) को भेजते हैं।
- प्रधानमंत्री तक प्रस्ताव: कानून मंत्री इस सिफारिश को आगे बढ़ाते हुए देश के प्रधानमंत्री के पास भेजते हैं।
- राष्ट्रपति की मुहर: अंत में, प्रधानमंत्री की सलाह पर भारत के राष्ट्रपति (President of India) द्वारा नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की जाती है।
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कोलेजियम सिस्टम (Collegium System) की क्या भूमिका है?
जब भी सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति की बात आती है, तो ‘कोलेजियम सिस्टम’ का नाम ज़रूर आता है। कोलेजियम सिस्टम सुप्रीम कोर्ट के जजों का एक समूह है (जिसमें CJI और 4 अन्य वरिष्ठ जज होते हैं), जो नए जजों की नियुक्ति और हाई कोर्ट के जजों के ट्रांसफर की सिफारिश करता है।
लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में कोलेजियम की सीधे तौर पर कोई भूमिका नहीं होती। CJI का पद पूरी तरह से वरिष्ठता (Seniority) के आधार पर तय होता है, बशर्ते वरिष्ठ जज इस पद के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से फिट हों।
क्या वरिष्ठता का नियम कभी तोड़ा गया है?
वैसे तो वरिष्ठता का नियम बहुत कड़ाई से माना जाता है, लेकिन भारतीय इतिहास में दो बार ऐसे मौके आए हैं जब इस नियम को दरकिनार किया गया:
- 1973 (जस्टिस ए.एन. रे): तीन वरिष्ठ जजों की अनदेखी करते हुए जस्टिस ए.एन. रे को मुख्य न्यायाधीश बना दिया गया था।
- 1977 (जस्टिस एम.एच. बेग): जस्टिस एच.आर. खन्ना (जो सबसे वरिष्ठ थे) को दरकिनार कर जस्टिस बेग को CJI बनाया गया था।
इन ऐतिहासिक घटनाओं ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर बड़े सवाल खड़े किए थे। हालांकि, अब वरिष्ठता का नियम पूरी तरह से स्थापित हो चुका है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश की असली शक्तियां क्या हैं?
एक मुख्य न्यायाधीश के पास केवल न्याय करने की ही नहीं, बल्कि कई असाधारण प्रशासनिक और संवैधानिक शक्तियां भी होती हैं:
- ‘रोस्टर के मास्टर’ (Master of the Roster): यह CJI की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण शक्ति है। सुप्रीम कोर्ट में कौन सा केस किस जज के पास जाएगा या कौन सी बेंच (जजों की टीम) किस मामले की सुनवाई करेगी, इसका फैसला केवल और केवल मुख्य न्यायाधीश करते हैं। कोई भी अन्य जज अपनी मर्जी से केस नहीं चुन सकता।
- संवैधानिक पीठ का गठन: देश के महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों को सुलझाने के लिए कम से कम 5 जजों की ‘संविधान पीठ’ (Constitution Bench) का गठन करने का अधिकार CJI के पास होता है।
- प्रशासनिक शक्तियां: सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों की नियुक्ति, कोर्ट की छुट्टियों का कैलेंडर तय करना और पूरे कोर्ट के कामकाज का प्रबंधन CJI ही करते हैं।
- राष्ट्रपति को कानूनी सलाह: संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत, यदि भारत के राष्ट्रपति को किसी अहम कानूनी या तथ्य के मुद्दे पर सलाह चाहिए, तो वे सुप्रीम कोर्ट से राय मांग सकते हैं। इस प्रक्रिया का नेतृत्व CJI करते हैं।
- कार्यवाहक राष्ट्रपति: एक बेहद खास स्थिति में—जब देश के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति, दोनों का पद किसी कारणवश खाली हो—तब भारत के मुख्य न्यायाधीश ही देश के राष्ट्रपति का कार्यभार संभालते हैं। (1969 में जस्टिस एम. हिदायतुल्लाह ने यह भूमिका निभाई थी)।
कार्यकाल, वेतन और पद से हटाने की प्रक्रिया
कार्यकाल: भारत में मुख्य न्यायाधीश का कोई फिक्स कार्यकाल (वर्षों में) नहीं होता है। वे 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक इस पद पर बने रहते हैं।
शपथ: नए CJI को पद और गोपनीयता की शपथ भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिलाई जाती है।
महाभियोग (Impeachment): मुख्य न्यायाधीश को उनके पद से हटाना बेहद मुश्किल है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में विशेष बहुमत (दो-तिहाई बहुमत) की आवश्यकता होती है। यह गर्व की बात है कि भारतीय इतिहास में आज तक किसी भी CJI को महाभियोग के जरिए नहीं हटाया गया है।
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निष्कर्ष ( Conclusion)
भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद हमारे लोकतंत्र के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है। उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि न्यायपालिका पूरी तरह से स्वतंत्र रहे और सरकार का इस पर कोई अनुचित दबाव न हो। एक “मास्टर ऑफ द रोस्टर” के रूप में, CJI देश की न्यायिक दिशा तय करते हैं और आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करते हैं।
आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि जजों की नियुक्ति के वर्तमान सिस्टम में किसी बदलाव की ज़रूरत है? अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर शेयर करें!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश कौन थे?
स्वतंत्र भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एच.जे. कानिया (H.J. Kania) थे।
Q2. वर्तमान में भारत के मुख्य न्यायाधीश कौन हैं?
वर्तमान में (2026) जस्टिस सूर्य कांत (Justice Surya Kant) भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश हैं। उन्होंने नवंबर 2025 में यह पदभार ग्रहण किया था।
Q3. क्या भारत में आज तक कोई महिला मुख्य न्यायाधीश (Female CJI) रही है?
नहीं, अब तक सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में कोई भी महिला मुख्य न्यायाधीश नहीं बनी है। हालांकि, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना के 2027 में पहली महिला CJI बनने की संभावना है।
Q4. भारत के मुख्य न्यायाधीश का वेतन कितना होता है?
भारत के मुख्य न्यायाधीश का वर्तमान वेतन 2.80 लाख रुपये प्रति माह है। इसके अलावा उन्हें मुफ्त आवास, कार और कई अन्य भत्ते मिलते हैं।